जीवन-दर्शन के सूत्र

(1) “ अगर इन्सानों के अनुरूप जीने की सुविधा कुछ लोगों तक ही सीमित है, तब जिस सुविधा को आमतौर पर स्वतन्त्रता कहा जाता है, उसे विशेषाधिकार कहना उचित है ।” -- डॉ. भीमराव आम्बेडकर (2) “ मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ । जो वाग्जाल मनुष्य को दुर्गति, हीनता और परमुखापेक्षिता से न बचा सके, जो उस की आत्मा को तेजोद्दीप्त न बना सके, उसे साहित्य कहने में मुझे संकोच होता है ।” -- आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

शनिवार, 24 जनवरी 2026

सम्प्रेषण 'मन की बात' करना भर नहीं!// #सम्प्रेषण 2

पुस्तकें और हम : ज़िन्दगी क्या है,किताबों को हटा कर देखो! #worldbookfair2026 #प्रगति_मैदान,दिल्ली-2

सम्प्रेषण : भाषिक और भाषा-इतर/ देहभाषा, संकेत-भाषा आदि भाषिक सम्प्रेषण में सहायक// #सम्प्रेषण-1