जीवन-दर्शन के सूत्र

(1) “ अगर इन्सानों के अनुरूप जीने की सुविधा कुछ लोगों तक ही सीमित है, तब जिस सुविधा को आमतौर पर स्वतन्त्रता कहा जाता है, उसे विशेषाधिकार कहना उचित है ।” -- डॉ. भीमराव आम्बेडकर (2) “ मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ । जो वाग्जाल मनुष्य को दुर्गति, हीनता और परमुखापेक्षिता से न बचा सके, जो उस की आत्मा को तेजोद्दीप्त न बना सके, उसे साहित्य कहने में मुझे संकोच होता है ।” -- आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

गुरुवार, 4 जून 2026

जहाँ पहली बार संजोये गये बुद्ध-वचन | सप्तपर्णी-संवाद-1

तथागत बुद्ध का स्मृतिस्थल : सप्तपर्णी गुफा (राजगीर) | सप्तपर्णी-संवाद - 0

पाठ्यक्रम में ठूँसे जाते अंधविश्वास! | आंबेडकर का तर्कशील समाज रचने का स्वप्न कैसे पूरा हो?